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COVID-19: वाराणसी का संकट मोचक मंदिर बंद, यहीं पर तुलसीदास ने की थी हनुमान अष्टक की रचना

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 वाराणसी 
कोरोना के कारण वाराणसी का प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर भी शनिवार की सुबह से आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। इसके बाद भी काफी संख्या में लोग पहुंचे और मुख्य गेट पर ही माला फूल चढ़ाने के साथ हनुमान को नमन किया। कुछ लोगों ने गेट के बाहर सड़क पर ही हनुमान चालीसा का भी पाठ किया। हर शनिवार आने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर ही शुक्रवार शाम मंदिर के महंत विश्वम्भर नाथ ने मंदिर के कपाट आम लोगों के लिए बंद करने का फैसला लिया था।  

शहर के दक्षिणी भाग में स्थित संकटमोचन मंदिर वाराणसी ही नहीं देश विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। काफी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो हर शनिवार और मंगलवार यहां आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जब वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया था, सबसे पहले यहीं आकर आशीर्वाद लिया था।  फिलहाल मंदिर को 25 मार्च तक के लिए बंद किया गया है। 
 

यहीं पर तुलसीदास ने की थी हनुमान अष्टक की रचना
गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान अष्टक की रचना यहीं पर की थी। 1560 के आसपास यहां के जंगलों में गोस्वामी तुलसीदास भक्त‍ों के बीच राम की स्तुती करते थे। उनको सुनने के लिए एक कुष्ट रोगी भी रोज आता था और सबसे पीछे बैठ जाता था। एक बार तुलसीदास ने उस रोगी के पास जाने की कोशि‍श की, लेकिन वह वहां से निकल गया। पीछा करते हुए तुलसीदास वन में पहुंचे और उसके पैर पड़क बोल पड़े- प्रभु दर्शन दीजिए। उन्होंने जिस स्थान पर प्रभु का पैर पकड़ा उस स्थान पर आज भी हनुमान जी मूर्ति स्थापित है। तुलसीदास ने अपने इसी हनुमान का नाम संकटमोचन रखा।

संकटमोचन हनुमान को अपने इष्टदेव मान, उन्होंने यहीं कई रचनाओं के साथ हनुमान अष्टक की रचना की। इन्हीं हनुमान जी के लिए मान्यता है कि 'आपन तेज सम्भहरो आपे, तिंनहु लोक हांकते कांपे'।

इसी जगह पर हनुमान जी के दर्शन तुलसीदास को हुए थे। उन्हीं के कहने पर वह मिट्टी की मूर्ती के रूप में परिवर्तित होकर भक्तों के लिए स्थापित हो गए।तुलसीदास ने हाथ में पीड़ा के निवारण के लिए 'हनुमान बाहुक' भी लिखा, संकट मोचन तभी से दुखों और संकट को हरने वाले संकट मोचन हनुमान के रूप में भक्तों के साथ हैं।

आज भी मौजूद है तुलसीदास के समय का वन 
करीब आठ एकड़ में फैला तुलसीदास के समय का वन आज भी मौजूद है। यहां वन कदम और वन फूल जैसे दुर्लभ वृक्ष हैं। हर साल कदम पेड़ की डाल विश्व प्रसिद्द नाग नथैया के लिए तुलसी घाट जाती है। वह पंपसार तालाब आज भी मौजूद हैं, जहां तुलसीदास के समय से चली आ रही राम और हनुमान के मिलन और सुग्रीव- बाली के युद्ध की लीला होती है। अमिताभ बच्चन ने अभिषेक की शादी की मन्नत यहीं मानी थी और पहला शादी का कार्ड संकट मोचन को चढ़ाया था। शादी से पहले ही ऐश्वर्या और अभिषेक को लेकर पहुंचे भी थे। हर साल होने वाले संकटमोचन संगीत समारोह में यहां हाजिरी लगाने की ख्यातिलब्ध संगीतकारों में होड़ सी मचती है। मंदिर में पाकिस्तान से आए गजल सम्राट गुलाम अली भी प्रस्तुति दे चुके हैं। पंडित जसराज तो होटल की जगह मंदिर के गेस्ट हाउस में ही रहते हैं।

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