जबलपुरमध्य प्रदेश

शुरू हुई कैदियोंं की रिहाई, छोडे़ गए 67 विचाराधीन कैदी

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जबलपुर
मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) की जेलों (prison) में मौजूद कैदियों (Prisoners) की भारी भीड़ कहीं कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण की वजह न बन जाए. इस आशंका के मद्देनजर मध्‍य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने सूबे की तमाम जेलों में बंद कैदियों को रिहा करने की प्रकिया शुरू कर दी है. फैसले के तहत, ऐसे विचाराधीन कैदी, जिनके जुर्म की सजा पांच साल से कम है, उन्‍हें 45 दिनों की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा रहा है.

जबलपुर केंद्रीय जेल के अधीक्षक गोपाल ताम्रकार ने बताया कि बीते दो दिनों में कुल 67 विचाराधीन कैदियों को रिहा किया जा चुका है, इनमे एक महिला कैदी भी शामिल है. इसके अलावा, 211 विचाराधीन कैदियों के प्रकरण आज न्यायलय भेजे गए है. न्‍यायालय से अनुमति मिलते ही इन कैदियों की रिहाई की प्रकिया शुरू कर दी जाएगी. उन्‍होंने बताया कि रिहा होने वाले कैदियों को उनके घर तक पहुंचाने की जिम्‍मेदारी भी जेल प्रशासन की है.

रविवार शाम, राज्य शासन द्वारा अधिसूचना जारी कर जेल मे बंद सजायाफ्ता कैदियो को भी 60 दिनो के पैरोल मे छोड़ने के निर्देश जारी किए गए है. यह पैरोल उन्‍हीं सजायाफ्ता कैदियों को दी जा रही है, जो पूर्व में भी पैरोल पा चुके हैं. इसके अलावा, विचाराधीन कैदियों को 45 दिन की जमानत पर घर जाने की इजाजत दी जा रही है. जेल से घर के लिए रवाना होने से पहले इन कैदियों को यह भी बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस से बचने के लिए बाहर किन-किन बातों का ध्‍यान रखना है.

गौरतलब है कि जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय जेल मे कुल 2400 कैदियों की क्षमता है, जबाकि वर्तमान में 2619 कैदी जेल मे बंद है. उच्चतम न्यायलय के निर्देश पर कैदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर छोड़े जाने के बाद जेलों की क्षमता काफी कम होगी. वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जेलों से छूट रहे विचाराधीन कैदियों ने खुद को 45 दिनो तक घरो मे लॉक डाउन रखने का भरोसा जेल प्रशासन को दिलाया है.

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