राजनीतिक

लॉकडाउन पर राहुल गांधी के बाद शशि थरूर ने PM मोदी पर उठाया सवाल, बोले- ‘जनता हारी है’

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नई दिल्ली 
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देशव्यापी लॉकडाउन की तुलना नोटबंदी से की है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और लॉकडाउन बिना तैयारी के साथ लागू किया गया। इसे लागू करने से पहले लोगों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। हिंदी में ट्वीट करते हुए थरूर ने कहा, ‘ना ही तब तैयारी थी और ना तो अब तैयारी है, तब भी जनता हारी थी, अब भी जनता हारी है। उस समय भी आम आदमी अंत में था और आज भी है।’ कांग्रेस सांसद ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर दो चित्रों को साझा करके नोटबंदी के दिनों और मौजूदा स्थिति की तुलना की। उन्होंने दिल्ली के आनंद विहार और गाजियाबाद के कौशाम्बी बस टर्मिनलों पर अपने मूल निवास स्थान पर लौटने के लिए लंबी कतार में खड़े प्रवासियों की भारी भीड़ की तुलना नोटबंदी के दौरान बैंकों के बाहर खड़ी भीड़ से की। 

एक तस्वीर पर उन्होंने नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन) लिखा और दूसरी पर ‘लॉकडाउन’ लिखा। कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कोरोनावायरस फैलने के कारण 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से पहले कथित तौर पर कोई तैयारी नहीं करने के लिए हमला बोला था। देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा संक्रामक कोविड-19 के फैलने की श्रृंखला को तोड़ने के लिए एक उपाय के रूप में की गई है। इसके बाद हजारों प्रवासी मजदूरों ने परिवहन सुविधा न मिलने पर पैदल ही दिल्ली छोड़ना शुरू कर दिया था। 

अचानक लॉकडाउन से भ्रम और भय पैदा हुआ 
इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से किए गए अचानक लॉकडाउन के कारण काफी डर और भ्रम पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने गरीबों की दुर्दशा को उजागर किया और घातक बीमारी से लड़ने के लिए कुछ विकसित देशों द्वारा घोषित पूर्ण बंद के अलावा अन्य कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘यह समझना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि भारत की स्थितियां अलग हैं। हमें बड़े देशों की तुलना में अलग कदम उठाने होंगे जो पूरी तरह बंद की रणनीति अपना रहे हैं।’ राहुल ने कहा कि भारत में दैनिक आय पर निर्भर करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जिससे महामारी के परिप्रेक्ष्य में सभी आर्थिक गतिविधियों को एकतरफा रोक देना ठीक नहीं है। उन्होंने आशंका जताई, ‘पूरी तरह आर्थिक बंद से कोविड-19 के कारण मरने वालों की संख्या खतरनाक रूप से बढ़ जाएगी।’ 

उन्होंने कहा, ‘अचानक बंद होने से काफी भय और भ्रम पैदा हो गया है।’ उन्होंने कहा कि फैक्टरियां, छोटे उद्योग और निर्माण स्थल बंद हो गए हैं और हजारों लोग कठिन यात्रा कर अपने गृह राज्यों में पहुंच रहे हैं। राहुल ने कहा कि मजदूरों को दैनिक मजदूरी नहीं मिल रही या पोषण एवं मूल सेवाएं हासिल नहीं हो रही हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे लोगों को आश्रय ढूंढने में सहयोग कर सकें और सीधे उनके बैंक खाते में धन दें ताकि अगले कुछ महीने तक वे मुश्किलों का सामना कर सकें। कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्ण बंद होने से लाखों बेरोजगार युवक अपने गांवों की तरफ जाएंगे जिससे वे गांवों में रह रहे अपने बुजुर्ग माता-पिता और बुजुर्ग आबादी को संक्रमित कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसे जीवन की काफी क्षति होगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता बुजुर्गों की रक्षा करना और उन्हें पृथक करना है और युवाओं को बुजुर्गों से नजदीकी के खतरे से आगाह करना है।’ 

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