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रिहाई के बाद बोले उमर अब्दुल्ला- अभी कोरोना से लड़ना है, राजनीति पर फिर कभी बोलूंगा

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श्रीनगर

लंबे अंतराल के बाद उमर अब्दुल्ला नजरबंदी से बाहर आए हैं। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय हिरासत में लिए गए पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रिहाई के बाद मांग की है कि जम्मू-कश्मीर में हाईस्पीड मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अभी कोरोना वायरस से लड़ना है। राजनीति के बारे में आगे कभी बात होगी। नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा है कि उन लोगों को भी रिहा किया जाए, जो लंबे समय से हिरासत में रखे गए हैं।
लगभग आठ महीने के बाद हिरासत से बाहर आए उमर ने यह भी कहा कि उनके लिए यह एक अलग दुनिया है। फिलहाल कोरोना वायरस के संकट से लड़ाई पर ध्यान देने की जरूरत है और राजनीतिक घटनाक्रमों पर बाद में बात हो सकती है। उन्होंने अपने घर के बाहर मीडिया से कहा, 'पिछले साल 5 अगस्त को जो हुआ और यहां के राजनीतिक हालात पर विस्तार से बात करूंगा। पहले कोरोना से निपटने दीजिए। हमें खुद को, परिवार को और दोस्तों को बचाना है।'

 
'अभी आर्टिकल 370 पर बात करना ठीक नहीं'
नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा, 'मैं चाहता हूं कि राज्य के भीतर और बाहर हिरासत में रखे गए लोगों पर केंद्र दया दिखाए और उन्हें रिहा करे।' उमर अब्दु्ल्ला ने कहा कि कोरोना वायरस के संकट से पैदा हुए हालात के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित हिरासत में मौजूद सभी लोगों को रिहा किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लोगों को बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ा लेकिन फिलहाल इस बारे में बात करना ठीक नहीं है क्योंकि लोग कोरोना की वजह से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

 

उमर बोले- 8 महीने बाद माता-पिता के साथ खाना खाया
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कोरोना वायरस के संकट से बचने के लिए सामाजिक मेलजोल से दूर रहें। उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'करीब 8 महीनों के बाद मैंने अपने माता-पिता के साथ दोपहर का खाना खाया। मुझे इससे बेहतर खाना याद नहीं आ रहा।' पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत हिरासत में लिए गए उमर को करीब आठ महीने बाद मंगलवार को रिहा किया गया। उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को 13 मार्च को रिहा किया गया था।
 

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