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राहुल गांधी के कोरोना के कम टेस्ट होने के आरोपों को ICMR ने बताया गलत, जानें क्या कहा

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 नई दिल्ली 
कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच के लिए कम परीक्षण किए जाने की दलील को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आंकड़ों के आधार पर गलत बताया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा भारत में कम परीक्षण किए जाने के आरोप के जवाब में आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक रमन आर गंगाखेड़कर कहा कि कोरोना परीक्षण की नीति को जनसंख्या के आधार पर देखना समझदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे दूसरे नजरिये से समझना होगा। 
    
आईसीएमआर ने दावा किया कि देश में 24 नमूनों की जांच में एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हो रही है। जबकि जापान में 11.7, इटली में 6.7, अमेरिका में 5.3, ब्रिटेन में 3.4 नमूनों की जांच पर एक व्यक्ति पॉजीटिव निकल रहा है। इसलिए जो लोग ज्यादा जांच की बात कह रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि देश में प्रति संक्रमित व्यक्ति पर ज्यादा जांचें हो रही हैं।

गंगाखेड़कर ने कहा कि अमेरिका, इटली, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों की तुलना में कोरोना मरीजों की पहचान के लिये भारत में न सिर्फ ज्यादा परीक्षण हो रहे हैं, बल्कि तार्किक और विवेकपूर्ण तरीके से भारत में परीक्षण किए जा रहे हैं। 
  
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने कोरोना वायरस संक्रमण को गुरुवार को 'अमीरों का रोग' और एक 'बड़ी चुनौती' बताते हुए कहा कि राज्य इस महामारी को फैलने से रोकने में सफल रहा है। क्योंकि संक्रमण के प्रतिदिन के मामलों में कमी आ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन को 03 मई के बाद हटाने की रणनीति तैयार करने के लिए वित्त सचिव एस. कृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। उन्होंने कहा कि यह रणनीति चरणबद्ध तरीके वाली हो सकती है। 20 अप्रैल के बाद किन उद्योगों को चलने की इजाजत दी जाए, उस पर चर्चा कर समिति फैसला लेगी। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों की एक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवादददाता सम्मेलन में कहा, यह रोग एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, 'यह अमीरों का रोग है। जिन लोगों ने विदेश यात्रा की या अन्य राज्यों की यात्रा की, वे इसे (तमिलनाडु में) लेकर आए। यह यहां उत्पन्न नहीं हुआ।' 
 

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