राजनीतिक

मप्र में पहली बार बीजेपी ने कांग्रेस को बिना कार्यकाल पूरा किए सत्ता से बाहर किया

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नई दिल्ली
 15 साल के सत्ता के सूखे को खत्म करते हुए कांग्रेस (Congress) ने मप्र की सत्ता में दिसंबर 2018 में वापसी की थी. लेकिन सिर्फ 15 महीने के बाद ही कांग्रेस की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government)की विदाई हो गई. कांग्रेस के सत्ता में आने के पहले दिन से बीजेपी (BJP) की ओर से दावा किया जा रहा था कि ये सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी. और हुआ भी कुछ ऐसा ही. कारण कुछ भी रहे हों, लेकिन मप्र के विधानसभा के इतिहास में ये पहली बार है, जब बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया. इससे पहले दो बार ऐसे मौके आए जब कांग्रेस ने बीजेपी और जनता पार्टी की सरकार को उसका कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया था.

2003 में बीजेपी ने उमा भारती के नेतृत्व में जबर्दस्त जीत हासिल की थी. हालांकि उमा भारती ज्यादा दिन सीएम नहीं रहीं. उनके बाद आए बाबूलाल गौर भी ज्यादा दिन इस सीट पर नहीं टिके. लेकिन उनके बाद नवंबर 2005 में आए शिवराज सिंह चौहान इस सीट पर जम गए. उन्होंने उसके बाद लगातार दो चुनावों में जीत हासिल कर सबसे लंबे समय तक मप्र के सीएम रहने का रिकॉर्ड बना दिया. लेकिन 2018 में वह अपनी सत्ता नहीं बचा पाए. कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. और सरकार बनाई, लेकिन ज्योतिरादित्य के कारण कांग्रेस सरकार गिर गई. इस तरह ये पहली बार है, जब कांग्रेस की सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई.

मप्र की राजनीति में इससे पहले दो मौके आए जब दो गैर कांग्रेसी सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं थीं. 1977 में मप्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी. जनता पार्टी को 320 सीटों में से 230 सीटों पर जीत मिली. कैलाश जोशी राज्य के मुख्यमंत्री बने. कांग्रेस को 84 सीटों पर जीत हासिल हुई. इमरजेंसी के बाद हुए इस चुनाव में कांग्रेसी बुरी हार हुई. लेकिन ये सरकार तीन साल ही चल पाई. इस दौरान तीन सीएम बदले गए. अंत में फरवरी 1980 में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

1990 के चुनाव में कांग्रेस की हार हुई. तब बीजेपी को 320 सीटों में से 220 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 56 सीटें ही मिलीं. सुंदर लाल पटवा सीएम बने. लेकिन इस सरकार को भी बीच में ही बर्खास्त कर दिया गया. रामजन्म भूमि आंदोलन और उसके बाद बाबरी मस्जिद विवाद के बाद ये सरकार 3 साल ही चल पाई. राष्ट्रपति शासन लगा और 1993 में कांग्रेस की फिर सत्ता में वापसी हो गई.

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