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प्रधानमंत्री कार्यालय नहीं जा रहे मोदी, ‘वर्क फ्रॉम होम’ से कोरोना पर बना रहे महा-प्लान

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 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से खुद को और अपने परिवारजनों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए घर के अंदर रहने की अपील की थी। वह खुद भी इस सलाह पर अमल कर रहे हैं और पिछले कुछ दिनों से 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास में ही हैं। मोदी साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय नहीं जा रहे हैं। इसकी जगह वह अपने आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें कर रहे हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम 20 और 24 मार्च को अपने दोनों संबोधन प्रधानमंत्री आवास से ही दिए।
 ईटी को मिली जानकारी के मुताबिक मुख्य सचिव पी के मिश्रा, कैबिनेट सेक्रटरी राजीव गौबा, स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डायरेक्टर बलराम भार्गव जैसे वरिष्ठ अधिकारी रोज प्रधानमंत्री के साथ उनके आवास पर बैठक करते हैं और उन्हें रोजाना की गतिविधियों के बारे में बताते हैं।
 

हर महत्वपूर्ण आंकड़े पर मोदी की नजर
बीमारी से ठीक हो चुके और अस्पतालों से छोड़े जा चुके लोगों के मामलों पर प्रधानमंत्री की करीबी निगाह है। मंगलवार सुबह तक ऐसे 37 मामले थे। एक सूत्र ने ईटी को बताया कि प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से इस आंकड़े के बारे अधिक बात करने को कहा है, जिससे लोगों में यह भरोसा जाए कि भारत के पास कोराना वायरस के मामलों को ठीक करने की क्षमता है। अधिकारी ने बताया, 'इन बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान भी प्रधानमंत्री और अधिकारी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। कई राज्यों में लागू ट्रैवल बैन और अधिक लोगों को 7, लोक कल्याण मार्ग पर बुलाने से बचने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विकल्प चुना गया है।'

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का सहारा
प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों, फार्मा इंडस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया और डॉक्टर्स और मेडिकल असोसिएशंस के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है। आने वाले दिनों में ऐसी और बैठकें होने वाली हैं। एक अधिकारी ने बताया, 'इन स्टेकहोल्डर्स से मिलने वाली जानकारियों को खुद पीएम मोदी नोट कर रहे हैं।' प्रधानमंत्री बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोगों को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करेंगे।
 

मोदी ने चुनी ट्रंप और जॉनसन से अलग राह
अमेरिका और यूके में क्रमशः डॉनल्ड ट्रंप और बोरिस जॉनसन रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, जिसमें उनसे सवाल भी पूछे जा रहे हैं। हालांकि मोदी ने यह विकल्प नहीं चुना है। इसकी जगह वह लोगों से सीधे जुड़ने के लिए दो बार राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं, जिसे वह अधिक प्रभावी तरीके के रूप में देखते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'प्रधानमंत्री ने 20 मार्च को राष्ट्र के नाम संबोधन में जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था। इसका जिस तरह से लोगों ने पालन किया, वह इस माध्यम की सफलता को दिखाता है।' सरकार की ओर से जॉइंट सेक्रटरी (हेल्थ) लव अग्रवाल और ICMR के डायरेक्टर बलराम भार्गव नियमित तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।

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