राजनीतिक

पद पाने तीन दर्जन माननीय मंत्रियों की मंशा कोरोना के चलते कमजोर

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भोपाल
कोरोना ने आम लोगों के जनजीवन को ही अकेला प्रभावित नहीं किया ही बल्कि प्रदेश के माननीय को भी अपनी राजनीतिक आशाओं को लेकर प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के तीन दर्जन से ज्यादा माननीय मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं, इसके लिए हमेशा की तरह मुख्यमंत्री की शपथ के बाद लॉबिंग तेज कर मंत्री पद पाने की मंशा कोरोना के चलते कमजोर हो गई है। हालांकि कई विधायक टेलीफोन और मोबाइल के जरिए अपने-अपने नेताओं से इस संबंध में लॉबिंग करने में पीछे नहीं हैं।

सूत्रों की मानी जाए तो अब शिवराज सिंह चौहान कोरोना के चलते 21 दिन का लॉक डाउन पूरा होने के बाद ही अपने मंत्रिमंडल की शपथ करवाएंगे। 14 अप्रैल को यह लॉक डाउन पूरा होगा। जबकि भाजपा के विधायकों को यह उम्मीद नहीं थी कि मंत्रिमंडल के गठन में इतना लंबा समय लगेगा। समय लंबा होने के चलते विधायकों के मंत्री बनने की इच्छा को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्हें लॉबिंग करने के लिए पूरा मौका भी नहीं मिल पा रहा। अपने-अपने क्षेत्र में डटे विधायक न भोेपाल आ पा रहे हैं और ना ही दिल्ली जा पा रहे हैं।

सूत्रों की मानी जाए तो कई विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से टेलीफोन और मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास नहीं लेकिन उनकी बात नहीं हो पाई। कुछ खास और सीनियर विधायकों की जरुर जेपी नड्डा से टेलीफोन पर बातचीत हुई है। वहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री सुहास भगत से भी कुछ विधायकों ने मंत्री बनाने के लिए टेलीफोन पर अपनी ही सिफारिश की है। कुछ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मंत्री बनाए जाने को लेकर मोबाइल और टेलीफोन पर बात की है। इनमें से अधिकांश लोगों को अश्वासन मिल गया है।

भाजपा के विधायकों को अपने मंत्री बनने पर कांग्रेस से आए 22 बागियों के कारण संशय है। इनमें से कम से कम दस नेताओं को शिवराज कैबिनेट में जगह मिलना तय माना जा रहा हैं। ऐसे में भाजपा के कम लोगों को ही मंत्री बनने का मौका मिलेगा। इसके अलावा सदन में विधायकों की संख्या कम होने के चलते फिलहाल संख्या के आधार पर  ही मंत्रिमंडल में सदस्य बनाए जाएंग। इस सब के बीच कोरोना के कारण ये लोग लॉबिंग करने न तो दिल्ली जा पा रहे ना ही भोपाल आ पा रहे, इसलिए मोबाइल और टेलीफोन के जरिए ही सक्रियता दिखा रहे।

इधर कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को मंत्री बनाए जाने को लेकर संशय की स्थिति दिखाई दे रही है। सूत्रों की माने तो इनमें से एक दर्जन से ज्यादा नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से टेलीफाने के जरिए लगातार संपर्क में बने हुए हैं। वहीं सिंधिया गुट से हाल ही में जुड़े बिसाहूलाल सिंह, हरदीप सिंह डंग, ऐंदल सिंह कंसाना भी लगातार भाजपा के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं।

सूत्रों की मानी जाए तो दो निर्दलीय के साथ ही बसपा के दोनों विधायक भी मंत्री बनने के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए ये चारों विधायक लगातार भाजपा के नेताओं से संपर्क टेलीफोन और मोबाइल के जरिए कर रहे हैं। हालांकि एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाने का विरोध भाजपा की एक महिला नेता ने दिल्ली तक कर दिया है।

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