अध्यात्मधर्म ज्योतिष

नवरात्र: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, ऐसे करेंगी हर संकट दूर

Spread the love

 
नई दिल्ली 

नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता का है. कार्तिकेय (स्कन्द) की माता होने के कारण इनको स्कंदमाता कहा जाता है. अतः इनको पद्मासना देवी भी कहा जाता है. इनकी गोद में कार्तिकेय भी बैठे हुए हैं. अतः इनकी पूजा से कार्तिकेय की पूजा स्वयं हो जाती है. तंत्र साधना में माता का सम्बन्ध विशुद्ध चक्र से है. ज्योतिष में इनका सम्बन्ध बृहस्पति नामक ग्रह से है. इस बार मां के पांचवे स्वरूप की पूजा 29 मार्च यानी आज हो रही है.

स्कंदमाता की पूजा से क्या लाभ होंगे?

– स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति सरलता से हो सकती है

– इसके अलावा अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट है तो उसका भी अंत हो सकता है

– स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करें तथा पीली चीज़ों का भोग लगाएं.

– अगर पीले वस्त्र धारण किएं जाएं तो पूजा के परिणाम अति शुभ होंगे.

– इसके बाद जो भी प्रार्थना है, विशेषकर संतान सम्बन्धी, करें

विशुद्ध चक्र के कमजोर होने के क्या परिणाम होते हैं?

– विशुद्ध चक्र कंठ के ठीक पीछे स्थित होता है

– इसके कमजोर होने से वाणी की शक्ति कमजोर हो जाती है

– इसके कारण हकलाहट और गूंगेपन की समस्या भी होती है

– इससे कान नाक गले की समस्या भी हो सकती है

– इसके कमजोर होने से व्यक्ति सिद्धियां और शक्तियां नहीं पा सकता

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
Close