बिहारराज्य

जापानी इंसेफेलाइटिस से साढ़े तीन साल के बच्चे की मौत, SKMCH में था भर्ती

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मुजफ्फरपुर
बच्चों की जान लेने वाली खतरनाक बीमारी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से साढ़े तीन साल के एक बच्चे की मौत हो गई है। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी जापानी इंसेफेलाइटिस ने बिहार में इस साल समय से पहले ही दस्तक दे दी है। मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड स्थित बाजी गांव के रहने वाले मुन्ना राम के साढ़े 3 साल के आदित्य को एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम ने अपना शिकार बनाया है। साढ़े 3 साल का आदित्य एसकेएमसीएच के पीआईसीयू वार्ड-2 में भर्ती था।

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉक्टर एसके शाही ने बताया कि साढ़े तीन साल के आदित्य को वेंटिलेटर पर रखा गया था, जहां उसकी हालत बेहद गंभीर थी। आदित्य में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की पुष्टि आरंभिक जांच में ही हो चुकी थी। डॉक्टर एसके शाही ने बताया कि एईएस के लक्षण दिखने के एक घंटे में अगर जांच शुरू हो जाती तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, आदित्य के मामले में उसके परिजनों ने एसकेएमसीएच आने में काफी देर कर दी, इसकी वजह से उसकी हालत ज्यादा खराब हो गई। जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।

दूसरी तरफ मोतिहारी के चिरैया थाना के अकौना निवासी सुपन सनी की 5 साल की बेटी सपना में भी एईएस यानी जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण देखने को मिले हैं। उसे भी एसकेएमसीएच के पीआईसीयू वार्ड-2 में भर्ती किया गया है। सपना की मां लालमुनी देवी ने बताया कि शुक्रवार की सुबह सपना अचानक बीमार हो गई उसे मोतिहारी सदर अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने बच्ची में बुखार और चमकी का लक्षण देखते हुए एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉक्टर एस के शाही ने बताया कि सपना की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। हालांकि उसे बुखार चमकी की दवा दी जा रही है और एईएस के प्रोटोकॉल से उसका इलाज हो रहा है।

शुक्रवार सुबह 9:30 बजे बीमार आदित्य को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया। पिछले साल एईएस का पहला केस अप्रैल महीने में आया था, लेकिन इस बार मार्च के अंतिम सप्ताह में एईएस यानी जापानी इंसेफेलाइटिस के ब्रेकआउट ने मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है। दोनों केस सामने आने के बाद जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने शनिवार को चिकित्सा विभाग के साथ-साथ अन्य सभी विभागों के पदाधिकारियों की हाई लेवल मीटिंग बुलाई और बच्चों के स्वास्थ्य की समीक्षा की गई।

इसके अलावा डीएम ने आईईएस से बीमार होने वाले बच्चों को बचाने संबंधी तैयारी का जायजा सर्जन डॉक्टर एस पी सिंह से लिया। शनिवार की शाम को डीएम खुद एसकेएमसीएच पहुंच गए और aes संबंधी तैयारी का निरीक्षण किया। हालांकि, रविवार देर शाम आदित्य की मौत हो गई। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम वही जापानी इंसेफेलाइटिस है जिससे हर साल मुजफ्फरपुर और गोरखपुर में सैकड़ों बच्चों की मौत होती है।

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