छत्तीसगढ़

कोरोना प्रकोप, घरों में सिमटा गणगौर पर्वं

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रायपुर
मनोवांछित वर और पति की दीघार्यु के लिए चैत्र कृष्ण पक्ष की तृतीया से चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तक युवतियों और सुहागिनों द्वारा किए जाने गणगौर पर्व की अंतिम कड़ी में शुक्रवार को विधिवत पूजा अर्चना कर गौरा जी को विदाई दी गई। कोरोना प्रकोप को ध्यान में रखकर महिलाओं ने घर पर ही ईसर गौर की विधिवत पूजा अर्चना की।

प्रज्ञा राठी ने बताया कि यह त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान 16 दिनों तक महिलाएं, युवतियों ईसर-गौर की पूजा करती है। इस दौरान गौर माता को दूध से दूध के छींटे दिए जाते हैं और उन्हें पानी पिलाया जाता है। चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन व्रतधारी महिलाएं गणगौर माता को सजा-धजाकर पालने में बैठाती है। इसी दिन गौर माता को माएके से विदाई दी जाती है। इस दिन उन्हें 16 फल खुद के, 16 भाई के, सोलह जणाई और 16 फल साल के अर्पित किए जाते हैं। शाम को गाजे बाजे के साथ गणगौर को विसर्जित किया जाता है।

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