भोपालमध्य प्रदेश

कमल नाथ सरकार के जाते ही खटाई में पड़ी जिला सरकार

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भोपाल 
कमल नाथ सरकार की विदाई होते ही जिला सरकार का फार्मूला खटाई में पड़ना तय है। दरअसल, वर्ष 2003 में जब भाजपा सरकार आई थी, तब सबसे पहले दिग्विजय सरकार के इस मॉडल को खारिज किया गया था। इसके बाद जिला योजना समिति भी सिर्फ नाम की ही रही। इसके सभी अधिकार वापस ले लिए गए, लेकिन कमल नाथ सरकार ने सत्ता में आते ही जिला सरकार व्यवस्था को बहाल करने का सैद्धांतिक फैसला किया। इसके मद्देनजर जिला योजना समिति की सदस्य संख्या बढ़ाने के लिए कानून में संशोधन भी किया गया। समिति को विभागों के कुछ अधिकार देने का प्रस्ताव भी बनाया पर यह लागू नहीं हो पाया। माना जा रहा है कि भाजपा सरकार, जिला सरकार मॉडल को लेकर चल रही प्रक्रिया पर रोक लगा देगी। सूत्रों के मुताबिक कमल नाथ सरकार ने विधानसभा का बजट सत्र खत्म होने के बाद जिला सरकार मॉडल को लागू करने की तैयारी की थी। इसके लिए तत्कालीन मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती ने दो-तीन बैठकें भी कीं। इसमें जिला योजना समिति को दिए जाने वाले अधिकारों को लेकर विभागों से अभिमत मांगा गया था। बताया जा रहा है कि अधिकांश विभाग सामान्य प्रशासन विभाग को अपना अभिमत भी दे चुके हैं।

इस पर कैबिनेट में निर्णय होने बाकी था। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कैबिनेट नोट तैयार करके मुख्य सचिव कार्यालय को भेजा चुका है। इसमें जिला योजना समिति को दो करोड़ रुपये तक निर्माण संबंधी कार्यों के टेंडर की मंजूरी जिला स्तर पर देने के वित्तीय अधिकार के साथ प्रशासकीय अधिकार में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। बताया जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन के चलते अब जिला सरकार मॉडल को फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।दरअसल, भाजपा लगातार इस व्यवस्था का विरोध करती रही है। वर्ष 2003 के चुनाव में भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार के विकेंद्रीकरण का मॉडल बताते हुए विरोध किया था और यह वादा किया था कि सरकार में आते ही इसे समाप्त कर दिया जाएगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने इसे अमलीजामा भी पहनाया था। इसके मद्देनजर यह संभावना जताई जा रही है कि अब जिला योजना समिति के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा। 

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