दिल्ली/नोएडाराज्य

‘आप’ सरकार ने दिल्ली में ऑक्सीजन संकट पर हाईकोर्ट में कहा- केंद्र की भी कुछ जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए

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नई दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट राजधानी में COVID19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर ऑक्सीजन सप्लाई सहित विभिन्न मुद्दों से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इस दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार को उस समय डॉक पर रखा गया है, जब केंद्र बुरी तरह से विफल हो गया है। केंद्र सरकार की भी कुछ जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, कागजों में सब कुछ पूरी तरह ठीक है और हमें दिल्ली के नागरिकों के प्रति पूरी तरह से सहानुभूति है। वकील राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट से दिल्ली को एक हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का निर्देश देने का आग्रह किया। दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि 8 पीएसए प्लांट्स में से 2 पहले से ही चालू हैं और 2 अन्य 30 अप्रैल तक चालू होने हैं। दिल्ली सरकार द्वारा बाकी सभी अनुमतियां दी गईं, लेकिन कुछ अधिकारियों ने इसमें अड़ंगा अटकाया और कहा कि उन्हें केंद्र शासित सरकार से एक बार फिर कुछ बदलाव और अप्रूवल की आवश्यकता है। वहीं, एमिकस क्यूरी ने महाराष्ट्र के आंकड़े साझा किए जिसे 1500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग के बदले लगभग 1616 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्राप्त हुई। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से अलग क्यों है? दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हमें कई कॉल आ रही हैं, यहां तक ​​कि आप (सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता) को भी लोगों से बेड दिलाने के अनुरोध वाली कॉल आ रही हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार से इस मुद्दे को जल्द हल करने के लिए कहते कहा कि दिल्ली में लोग पीड़ित हैं और कई लोग ऑक्सीजन की कमी के कारण जान गंवा चुके हैं।

कोरोना ऐप में संशोधन पर विचार करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली कोरोना मोबाइल ऐप में अस्पतालों में बेड्स के श्रेणीकरण, हेल्पलाइन नंबर बनाने, जांच में देरी और आरटी-पीसीआर जांच किट की कमी को लेकर बुधवार को कई निर्देश जारी किए थे। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने अस्पतालों में बेड्स की अनुपलब्धता और कोविड मरीजों के इलाज में काम आने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार से कहा कि वह अपनी कोरोना मोबाइल ऐप में संशोधन करने पर विचार करे और ऐप में यह जानकारी दी जाए कि कौन से बेड ऑक्सीजन से लैस हैं और कौन से नहीं हैं। अदालत ने बिना ऑक्सीजन वाले बेड्स की जरूरत पर सवाल करते हुए कहा कि कोविड-19 से संक्रमित मरीज आमतौर पर होम आइसोलेशन में चला जाता है और उसे अस्पताल में तब भर्ती कराना पड़ता है जब उसे ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह एक रिपोर्ट दायर करे जिसमें प्रयोगशालाओं द्वारा जांच में देरी करने और आरटी-पीसीआर किटों की कमी को दूर करने के उपायों के बारे में बताया गया हो। अदालत ने कहा कि वह 29 अप्रैल को कोविड-19 से संबंधित सभी मामलों पर आगे सुनवाई करेगी।   

 

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